Adarsh Tantra™ - seeking for perfect discipline

Dedicated to the rich social,cultural and spritual heritage of my country. Let's join our hands to build it up "Golden Bharat" again


I shall share whatever be the useful in developing good traits in us.Earning and imparting Education and Knowledge is one of my objective.

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Original Thoughts 1

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Sannata Kitna Gehra Hai

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अचरज आँखों में नींद नहीं बेचैन हुआ मन मेरा है

निद्रा में देखो लीन सभी सन्नाटा कितना गहरा है

कुछ हुआ आज यूँ सुबह-सुबह कुछ काम अनोखा कर आये

कुछ पहले से था और साथ में जोश लबालब भर लाये

गतिमान हमारे पाँव आज चलचित्र भवन की ओर बढ़े

चल रहा किसी श्रीमान का एक वक्तव्य सुन लिया खड़े-खड़े

फिर क्या था थोड़ा सुना और ज्यादा सुनने की इच्छा से

जम गये हमारे पाँव प्राप्त कर ऐसी दुर्लभ  शिक्षा से

असफल होते हर बार जीत की आस लगाना क्यों त्यागें

थोड़े घायल होते ही हम मैदान छोड़कर क्यों भागें

रणनीति बना डाली हमने उत्साहित इतना हो कर के

एक नींद मार लें करें शुरू फिर थोड़ा सा हम सो कर के

छोटी सी घटना घटी और दिन का वो पंछी भाग गया

किन्तु लगता है एक ओर एक सोया  उल्लू जाग गया

किससे कह दें अब कौन सुने यह कथा हमारे रोने की

अब ध्यान नहीं देता कोई सबको जल्दी है सोने की

अपने स्वप्नों में मग्न सभी हाँ हूँ हूँ करते जाएंगे

फिर देख के सोता उन सब को सर पीट के हम सो जाएंगे....

                    

Sarfaroshi ki tamanna aaj

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सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है

सोचता कोई नहीं क्यों और न कोई बातचीत
देखता हूँ मैं जहां सब किश्तियाँ साहिल में हैं ।
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है
दिख रहा है ज़ोर कितना बाजू-ए क़ातिल में है ।।
वक़्त कब होगा बताओ पूछता है आसमां
रक्तरंजित हो रहा है हर तरफ से ये जहां।
आज मिट जाने की हसरत क्या किसी के दिल में है
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है ।।
हर तरफ खामोश नज़रें पूछती एक बात हैं
दूर कर सकता क्या कोई ये अंधेरी रात है ।
लग रहा है आज ऐसा हर कोई दलदल में है
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है ।।
हर कोई दिखता है अब तो एक बेहोशी को लिए
सर नहीं शायद कोई सरफरोशी के लिए ।
अब बरसने की हिमाकत कौन से बादल में है
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है ।।
देखने वाला नहीं क्यों है कोई क़ातिल को आज
पाँव कैसे आज लौटे पहुँच के मंजिल के पास ।
रक्त है अब वो न शायद बह रहा जो दिल में है
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है ।।
आज रुख बदला हवा का और बदला तेरा राग
चीख़ती है माँ कि बेटे ही नहीं रखते हैं लाज ।
लौट आओ आज बिस्मिल अब वतन मुश्किल में है
सरफरोशी की तमन्ना आज किसके दिल में है ।।